बुधवार, 17 जून 2015

छत्तीसगढ़ के माटी


छत्तीसगढ़ के माटी


मोर छत्तीसगढ़ के माटी
तोला बंदव कोटि-कोटि।
सुग्घर होथे इंहा खेती
बड़ सुहाथे अंगरा रोटी।

पावन हे हमर भुईयां
सुन ले मोर जहुरिया।
इंहा ले झन जा दुरिहा
खा ले तै ह किरिया।।

निर्मल हे मोर गांव
बर पीपर के छाँव।
कौशल्या दाई के पाँव
तै आजाबे मोर गांव।।

घर म आथे मेहमान
करथन अब्बड मान।
छत्तीसगढ़ ल तै जान
ईही हमर पहिचान।। 

चल संगी चल मितान
नागर धरले ग किसान।
उगाबो सोनहा धान
आजाही नवा बिहान।। 

माटी हमर मितान
कहिथे हमर सियान।
भुईयां बर दव धियान
माटी बिन छूटही परान।। 

रचना - देव हीरा लहरी
चंदखुरी फार्म मंदिर हसौद 
जिला - रायपुर छत्तीसगढ़ 
संपर्क - 09770330338
रचना तारीख - 17/06/2015

पत्र पत्रिका मे प्रकाशन 

1) राष्ट्रीय दैनिक अखबार 
पत्रिका पहट छत्तीसगढ़ 
सोमवार 13 जुलाई 2015

2) राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक अखबार 
देशबंधु रायपुर मड़ई पेज
रविवार 20 सितंबर 2015

3) राष्ट्रीय दैनिक अखबार 
दैनिक भास्कर बिलासपुर संस्करण 
बुधवार 30 सितम्बर 2015

4) स्थानीय मासिक पत्रिका 
अंजोर छत्तीसगढ़ी मासिक 
अंक सितम्बर 2015

5) स्थानीय दैनिक समाचार पत्र 
किरण दूत रायगढ़ से प्रकाशन 
गुरूवार 31 दिसंबर 2015