गुरुवार, 27 अगस्त 2015

रक्षाबंधन परब


।। रक्षाबंधन परब ।।

।। ये कविता मोर पांच बहिनी ल समर्पित ।।

  होत बिहनिया नहा धो हो जाथे तियार 
अब्बड करथे हमर बर मया अऊ दुलार
     अरूण अरूणा दिव्या दुर्गा दीपिका 
इही तो हरय हम भाई बहिनी के तिहार

  हमर बड़े दीदी के सोर सुरता करथन भारी 
डीके उमा मनीष अऊ पंकज केे वो महतारी
 छन्नु भांटो के तो बातें हे बड़ गजब निराला
   रोज बिहनिया पहुंच जाथे ओहा मधुशाला

नवापारा वाली मंझली दीदी अरूणा 
 बरसत रहिथे हमर बर बड़ करूणा
   चमकत रहाय ओकर घर के चंदन 
  अईसन बहिनी ल मोर प्रणाम बंदन

गियान के दीपक लईका के मन म जलाय 
 ससुरार अऊ मईके दुनो ल सुग्घर सजाय
    बुआ फुफा मन तोर देवकी नाव धराय 
  दिव्या दीदी उपर वाले रहे हमेशा सहाय

   सियानी के गोठ बात अऊ करय नियाव 
  घर म लईका लोगन मन के करय हियाव
    शक्ति के अवतार हवस वो तै दुरगा दाई
तोर चरण पखारंव वो मोर घर के महामाई

  सुजी पानी गोली दवई के बढ़ाय तै अपन ज्ञान 
देखे नाड़ी तुरंत बताये बिमारी तोर पढ़ई विज्ञान
  सबले छोटे अऊ सबले दुलऊरिन गुड़िया रानी
  सब ल स्वस्थ रखही डाक्टरीन दीपिका सयानी

     हम पांच भाई के इही हवय शुभकामना
जीनगी म दुख के झन होतीस कभु सामना
  अनिल अशोक अजित देव दीपक मिलके 
   स्वच्छ सुखी जीवन के करत हन कामना

।। राखी तिहार के गाडा गाडा बधा ।।

  रचनाकार - देव लहरी 
  चंदखुरी फार्म रायपुर 
  मोबा. 9770330338