गुरुवार, 7 अप्रैल 2016

सहर ले सुग्घर गांव

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सहर ले सुग्घर गांव
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हम गरीब के का बतावव हाल ल
खाय कमाय बर आये हवन सहर
ये का होवत हे हमर रइपुर म
इहां तो मनखे उपर होवत हे कहर

               गांव के धुर्रा माटी गली चौपाटी
               सहर के माटी म घुरे हवय जहर
               कईसे जीबोन कईके कटही जिनगी
               अब नई पहावत हे इहां चार पहर

सुरता आवत हे हमर मया के छांव
गांव के नदिया तरिया के लहरा
जेती जावन तेती मजा उड़ावन
नई रहाय कोनो कोती पहरा

               कका बबा महतारी अऊ मितान
               संगी मन के मया रहाय बड़ गहरा
               रददा हे बड़ दूरिहा कईसे पहाही
               अब नई पहावत हे चार पहरा

सहर के नाली म गंदगी हे भरमार
गांव के फुल बगिया करे महर महर
इंहे रहव झन जावव तुमन सहर
अब नई पहावत हे इहां चार पहर

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रचना - देव हीरा लहरी
           चंदखुरी फार्म मंदिर हसौद 
           रायपुर छत्तीसगढ़ 
           मोबा :- 09770330338 
           devlahari.blogspot.com
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सहर ले सुग्घर गांव ये मोर छत्तीसगढ़ी 
कविता ह दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर 
बिलासपुर पेज - संगवारी म प्रकाशित होय 
हे दैनिक भास्कर के संपादक अऊ पुरा परिवार 
ल बहुत बहुत धन्यवाद अऊ आभार। 

          
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सहर ले सुग्घर गांव मोर ये छत्तीसगढ़ी 
कविता ह छत्तीसगढ़ के पहली 
छत्तीसगढ़ी अखबार अंजोर छत्तीसगढ़ी 
मासिक पत्रिका म प्रकाशित होय हे 
संपादक भईया जयंत साहू जी ल 
बहुत बहुत धन्यवाद अऊ आभार। 

            
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सहर ले सुग्घर गांव 
इहीच कविता ल हमर राजिम टाईम्स 
के संपादक श्री तुकाराम कंसारी जी 
ह अपन पत्रिका म प्रकाशित करिस 
हे येकर बर भईया ल बहुत बहुत धन्यवाद। 
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