गुरुवार, 24 नवंबर 2016

बेटियों के लिए छोड़ी बेटे की चाह


"बेटियों के लिए छोड़ी बेटे की चाह"

● युवा दंम्पती ने पेश की मिशाल
● दो लड़की के बाद कराई नसबंदी

रायपुर : ऐसे लोग बहुत है जो बेटे की चाह मे बेटियाँ पैदा करते जाते है, लेकिन आज समाज मे जागरूकता के साथ सोच और विचार मे परिवर्तित आया है। बेटा कुल का दीपक तथा वंश को आगे बढ़ाने वाला चिराग होता है, बेटियों के लिए बेटे की चाह को त्यागना ये बहुत बड़ा निर्णय होता है। इसी सोच के साथ रायपुर आमासिवनी के युवा दंम्पती रामनाथ लहरी तथा उनकी पत्नी सरोजनी लहरी ने दो लड़कियाँ होने के बाद नसबंदी का फैसला लिया तथा अपनी बेटियों को वो हर खुशियाँ देना चाहती है जो एक बेटे के लिए होता है। युवा दंम्पती के इस फैसले से मेहर समाज गौरांवित हुआ है तथा समाज मे बेटियों के प्रति एक सकारात्मक संदेश गया है।

मीडिया रिपोर्ट 
हरिभूमि, दबंग दुनिया, पायनियर अखबार 
रायपुर गुरूवार 24 नवंबर 2016